बॉलीवुड के ये मशहूर हास्य अभिनेता जिन्हें हम आज ऑनस्क्रीन मिस करतें हैं

एक ज़माना था जब कोई भी फिल्म हास्य कलाकारों के बिना पूरी नहीं होती थी | हर फिल्म में कम से कम एक हास्य कलाकार तो जरुर होता था जों की बोरिंग फ़िल्म में भी जान ले आता था | एक्शन, ड्रामा और कॉमेडी एक साथ तीनो को पेश करना बॉलीवुड हीरोज़ के बस की बात नहीं थी | पर जैसे जैसे इंडियन सिनेमा वास्तविकता की तरफ बढ़ता गया, इन हास्य कलाकारों का रोल फिल्म में उतना ही कम होते चला गया | १९९० के करीब फिल्म के मुख्य कलाकारों ने कॉमेडी करना भी शुरू कर दिया जैसे गोविंदा, अनिल कपूर जिनकी कॉमेडी लोगो को पसंद भी आई और लोगो ने हीरो को हास्य कलाकारों के रूप में अपनाना भी शुरू कर दिया | तो आज हम उन्ही हास्य कलाकारों को याद करतें हैं जिनकी कॉमेडी ने हमे खूब हसाया और कभी कभी तो हँसा हँसा के रुला दिया ...जों आज मानो जैसे , कही खो गए हैं |  
 
जॉनि लीवर 
 
 
ये है १९८० के दशक के बॉलीवुड के मशहूर कलाकारों में से एक | जॉनि ने अपनी मिमिकरी / कॉमेडी एल्बम भी रिलीज़ किया था, जों ना की सिर्फ भारत में बल्कि पुरे देश में मशहूर हुआ था | इस एल्बम ने जॉनि के फैन्स की लिस्ट बहुत ज्यादा लम्बी कर दी थी | इनकी सबसे बड़ी कामयाब फिल्म थी "बाज़ीगर", जिसके बाद जॉनि अक्सर हर फिल्म में सहायक किरदार या हास्य कलाकार के रूप में दिखाई देने लगे | वो अपने कई किरदार के नाम से जानें जाने लगे जैसे, "छोटा छतरी" "असलम भाई" आदि | फिल्म "जुदाई" में उनका अभिनय और मशहूर डायलॉग "अब्बा डब्बा जब्बा" हमे आज भी याद है | और अब हम फिल्म "हाउसफुल ३" में जॉनि के अभिनय के लिए बेसब्री से इंतज़ार कर रहें है |
 
परेश रावल 
 
 
जब भी हम परेश रावल की बात करते है हमे उनका एक कैरेक्टर तुरंत याद आ जाता है और वो है, फिल्म "हेरा फेरी" के बाबुराव गणपतराव आपटे, जिसके लिए उन्हें फिल्मफेर बेस्ट कॉमेडियन अवार्ड से नवाज़ा गया था | उनकी कॉमेडी हमे कई फिल्मो में देखने मिली जैसे, अंदाज़ अपना अपना (१९९४), चाची ४२० (१९९७), हेरा फेरी (२०००), नायक (२००१), आँखे (२००२), आवारा पागल दीवाना (२००२), हंगामा (२००३), हलचल (२००४), दीवाने हुए पागल (२००५), गरम मसाला और हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म 'वेलकम बैक' | 
 
कादर खान 
 
 
'दुल्हे राजा', 'हीरो नंबर १', 'साजन चले ससुराल', और भी कई फिल्मो में मौजूद गोविंदा और कादर खान की जुगलबंदी को कोई नहीं भूल सकता | हर सीन में इन दोनों की कॉमेडी ने हमें खूब हसाया | कादर खान को फिल्म 'बाप नम्बरी बेटा दस नम्बरी' के लिए फिल्मफेर बेस्ट कॉमेडियन अवार्ड भी दिया गया था | कादर खान ने 'हिम्मतवाला', 'कुली नम्बर १', 'बड़े मियां छोटे मियां' जैसी फिल्मो में भी बहुत अच्छा काम किया था |
 
सतीश कौशिक
 
 
खैर, हम इस बात से बेहद खुश है की अब हम इन्हें रोज़ टेलीवीजन शो 'सुमीत संभाल लेगा' में देख सकते हैं | जहाँ सतीश कौशिक निभा रहें है फूडी ससुर का रोल | पर हम आज भी सतीश कौशिक को 'मिस्टर इंडिया' के कैलेंडर के नाम से जानते हैं |  इन्हें आज भी अपने दोस्त डेविड धवन की फिल्म "दीवाना मस्ताना" के 'पप्पू पेजर' के नाम से जाना जाता है | 
 
टिकू तलसानिया 
 
 
टिकू ने अपना करियर १९८६ में राजीव मेहरा की फिल्म 'प्यार के दो पल' से शुरू किया था | उन्होंने हास्य कलाकार बन कर कई फिल्मो में काम किया जिनमे से कुछ हैं, 'दिल है की मानता नहीं', 'उम्र पचपन का दिल बचपन का', 'बोल राधा बोल', 'मिस्टर बेचारा' | फिलहाल, यें टेलीविज़न के कॉमेडी-हॉरर शो 'प्रीतम प्यार और वो' का हिस्सा हैं |  
 
असरानी 
 
 
असरानी ने अपने 'शोले' के आइकोनिक किरदार जेलर से दुनिया भर में नाम कमाया | उनका डायलॉग "हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं" आज भी लोगों को याद है और आज भी कई  हास्य कलाकार इस डायलॉग को दोहराते हैं | असरानी ७० के दशक में तकरीबन १०१ फिल्मों में काम कर चुके थे और ८० के दशक में ये संख्या १०७ तक पोहंच गई | 
 
राकेश बेदी 
 
 
राकेश बेदी फिल्म 'चश्मे बदूर' (१९८१) और टेलीविज़न शो 'ये जों है ज़िन्दगी' (१९८४), 'श्रीमान श्रीमती' (१९९५) और 'यस बॉस' (१९९९-२००९) से मशहूर हुए | जब भी बात आती है कॉमेडी और हास्य कलाकारों की तो राकेश बेदी को कोई नहीं भूलता | 
 
जगदीप 
 
 
ये मशहूर थे 'शोले' के सूरमा भोपाली केकिर्दार से | बिमल रॉय की फिल्म 'दो बीघा ज़मीन' से जगदीप ने कॉमेडी रोल करना शुरू किया था | फिर इन्होने फिल्म 'पुराना मंदिर' (१९८४) में केरेक्टर 'मच्छर' निभाया | फिल्म 'अंदाज़ अपना अपना' में ये मशहूर हास्य कलाकार ने सलमान खान के पिता का रोल निभाया जों दिन में टेलर होता था और रात को अपने ही बेटे के बॉलीवुड में एंट्री लेने के सपने को तोड़ता था | 

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